Wednesday, 16 January 2019

Hindi-sahayri-post-7

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तन्हा खड़ा था किनारे में, लहरों को ताकते हुए। 
खुद से ही नाराज था, ज़ख्मों को झांकते हुए। 
कुछ शिकायत थी खुद से, क्यों ऐतबार किया, 
उस बेवफा से आखिर क्यों प्यार किया, 
क्यों प्यार किया। 
आंसुओं की अब बरसात हो रही है, दिल के साथ लहरें भी रो रहीं है। 
थक चुका हूं समझाते समझाते, की क्यों ना इनकार किया, 
उस बेवफा से आखिर क्यों प्यार किया, 
क्यों प्यार किया। 
दिल टूट ही चुका तो अब बस भी कर, 
मोहब्बत से नहीं तो धोखे से डर। 
यूँ रो रो कर भी क्यों उसका दीदार किया, 
उस बेवफा से आखिर क्यों प्यार किया, 
क्यों प्यार किया।



मैं पागल हूँ नादान हूँ, फिर भी तू छोड़ के जाती है, 
अब आ भी जाना जानू, क्यों इतना तड़पाती है। 
 डर लगता है अंधेरे से, अब आकर हाथ तो थाम भी ले, 
मैं कान लगाए बैठा हूँ, तू कहीं से भी बस नाम तो ले, 
तू चली गयी मर जाऊंगा, अब रूह भी कांप सी जाती है, 
अब आ भी जाना जानू, क्यों इतना तड़पाती है। 
 सब कहते हैं मैं ज़रा पागल हूँ, तू कहती थी वो हैं पागल, 
कहीं नजर मुझे ना लग जाये, आंखों से देती थी काज़ल, 
फिर लोग लगे हैं हँसने देख, बस एक तू ही समझाती है, 
अब आ भी जाना जानू, क्यों इतना तड़पाती है। 
 ये देख मुझे कोई मार रहा, पत्थर के धूल वो झाड़ रहा, 
ये कपड़े तेरे दिये हुए, इनको भी कोई फाड़ रहा, 
अब लगता है मर जाऊंगा, अब तुझको छोड़ मैं जाऊंगा, 
चल खंजर खुद मैं मार रहा, जिद्द से तेरे मैं हार रहा, 
अब मान गया मैं पागल हूँ, इस खातिर तू शरमाती है, 
अब ना आना मेरी जानू, 
कोई और तेरा अब साथी है...
कोई और तेरा अब साथी है। 
अलविदा.......

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